भाजपा के लिए 2019 लोकसभा चुनाव की राह नही होगी आसान

भारतीय जनता पार्टी को उत्तर प्रदेश की गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में  हार का सामना करना पड़ा.गोरखपुर सीट जहां प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सीट थी तो वहीं फूलपुर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की सीट थी.इन दोनों सीटों पर सपा के प्रत्याशी ने भाजपा उम्मीदवार को हराकर जीत दर्ज की.इस उपचुनाव को समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने मिलकर लड़ा था.Image result for मोदी-राहुल-मायावती-अखिलेश

वहीं, बिहार के अररिया लोकसभा सीट और जहानाबाद विधानसभा सीट पर भी भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़ा .लालू प्रसाद की गैरमौजूदगी में तेजस्वी यादव ने पार्टी उम्मीदवार को जीत दिलाने में सफल हुए. भाजपा को एकमात्र जीत भभुआ विधानसभा सीट पर मिली.जहां पर रिंकी रानी पांडेय ने जीत दर्ज की.   
बीजेपी की यह अप्रत्याशित हार त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय राज्यों में पार्टी की शानदार जीत के कुछ ही दिनों बाद हुई  है. बीजेपी ने त्रिपुरा में पिछले 25 वर्ष से सत्ता में रही वाम दल के किले को ढहाकर पहली  बार वहां अपनी सरकार बनाई. वहीं,  अपने क्षेत्रीय सहयोगी दलों के साथ मिलकर बीजेपी ने नगालैंड और मेघालय में भी सरकार बना ली थी. 

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भाजपा के लिए 2019 का लोकसभा चुनाव जीतना नही होगा आसान 
अगर हम पिछले कुछ सालों में हुए लोकसभा उपचुनाव में नजर दौड़ाएं तो हमें पता चलेगा कि बीजेपी को अधिकतर सीटोें पर हार का सामना करना पड़ेगा .इस बात को आप इस तरह आसानी से समझ सकते हैं कि लोकसभा में बीजेपी के सदस्‍यों की संख्‍या 2014 के 282 से घटकर 272 पर पहुंच गई है.मौजूदा समय में लोकसभा में  536 सांसद हैं जबकि सात सीटें खाली हैं.

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बीजेपी को इस साल सबसे पहले जनवरी में राजस्थान की अजमेर और अलवर लोकसभा सीट पर हार का मुंह देखना पड़ा,जहां कांग्रेस के युवा नेता सचिन पायलट ने बीजेपी को हार का सामना करने पर विवश कर दिया.जबकि ,बीजेपी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में राजस्‍थान की सभी 25 सीटों पर जीत हासिल की थी. 2017 में  पंजाब के गुरदासपुर सीट पर भी बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा . यह सीट बीजेपी के सांसद और मशहूर अभिनेता विनोद खन्‍ना के निधन के बाद खाली हुई थी.
2014 के लोकसभा चुनाव के बाद 20 सीटों पर उपचुनाव हुए हैं, जिसमें से सिर्फ तीन सीटों पर बीजेपी को जीत हासिल हुई है. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि 2018 में छह लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में बीजेपी ने एक भी सीट पर जीत हासिल नहीं की है. ये उपचुनाव राजस्थान, पश्चिम बंगाल,उत्तर प्रदेश और बिहार में हुए हैं.

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2014 में पांच लोकसभा सीटों पर हुए चुनाव में से बीजेपी ने दो सीटों पर जीत हासिल की थी. इसमें एक गुजरात के वडोदरा सीट थी जबकि दूसरी महाराष्‍ट्र की बीड लोकसभा सीट . वहीं, तेलंगाना की मेडक सीट पर टीआरएस, यूपी की मैनपुरी सीट पर सपा और उड़ीसा के कंधमाल सीट पर बीजद ने जीत हासिल की थी. साल 2015 भी बीजेपी के लिए अच्‍छा नहीं रहा. इस साल तीन लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में पार्टी को एक सीट पर भी जीत हासिल नहीं हुई. इसमें पश्चिम बंगाल के बनगांव की सीट पर टीएमसी, तेलंगाना की वारंगल सीट पर टीआरएस और मध्‍यप्रदेश की रतलाम सीट पर कांग्रेस ने जीत हासिल की थी.

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साल 2016 में तीन सीटों पर उप चुनाव हुआ. इसमें बीजेपी ने मध्‍यप्रदेश की शहडोल सीट पर जीत हासिल की. ज‍बकि पश्चिम बंगाल की कूच बिहार और तमलुक सीट पर तृणमूल कांग्रेस  ने जीत हासिल की. 2017 में भी तीन सीटों पर हुए उपचुनाव में भी बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा. इसमें केरल के मलप्‍पुरम सीट पर आईयूएमएल, पंजाब के गुरदासपुर सीट पर कांग्रेस और जम्‍मू-कश्‍मीर की श्रीनगर सीट पर हुए उपचुनाव में जेकेएनसी ने जीत हासिल की थी. 

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भाजपा को 2019 में जीत दर्ज करने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी.इस साल  राजस्थान,मध्य प्रदेश और छ्त्तीसगढ़ राज्यों में चुनाव होने हैं जिसे सत्ता का सेमीफाइनल माना जाता है.यहां पर भी भाजपा की राह आसान नही होने वाली है क्योंकि राजस्थान में जहां सचिन पायलट की कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा तो वहीं मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया का.
अब देखना यह है कि भाजपा इन चुनौतियों का सामना कैसे करेगी ?क्या वह यहां पर पिछली बार की तरह जीत दर्ज करने में सफल होगी या फिर यहां पर भी हार का सामना पार्टी करना पड़ेगा.

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रिपोर्ट
अच्युत द्विवेदी

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