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जुलाई, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
कलाम  का व्यक्तित्व कलाम बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे . उनके जैसे व्यक्ति निराले ही होते हैं. कलाम जी मन में जो एक बार निश्चय कर लेते  थे तो उसे पूरा कर के ही मानते थे. इन्होने कभी धार्मिक आधार पर किसी के साथ भेदभाव नही किया. वह सभी के प्रिय थे . कलाम जी  एक प्रसिद्द शिक्षक ,वैज्ञानिक और इंजीनियर थे . इन्होने देश को मिसाइलें प्रदान की. इन्हें मिसाइल मैन के नाम से जाना जाता है . इन्होने डीआरडीओ और इसरो में भी कार्य किया . कलाम जी  बच्चों के भी प्रिय थे . उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की भलाई में समर्पित कर दिया था. उन्होंने अपने मृत्यु तक भी छात्रों को शिक्षा देते रहे. अपने प्रतिभा के बल पर इन्होने देश के सर्वोच्च पद को सुशोभित किया .वह भारत के ग्यारहवें राष्ट्रपति चुने गये थे . उनका जीवन हम सभी के लिए अनुकरणीय है . वह छात्रों के प्रेरणा स्त्रोत रहे . उन्होंने अपनी पूरी जिन्दगी देश को समर्पित कर दी . उन्होंने आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प किया . वह लोगों के दिलों में हमेशा जिन्दा रहेंगे. उनका कहना था  ‘ सपना वह नही जो आप नींद में देखते हैं बल्कि सपना तो वो...

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कारगिल की लड़ाई पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई ने 1998 में परमाणु परीक्षण के बाद दोनों देशों के बीच आपसी सम्बन्ध को सामान्य करने के उद्देश्य से पाकिस्तान की यात्रा की लेकिन पाक ने इसके बदले मे हमे कारगिल की लड़ाई दी . 6 मई से शुरु हुई कारगिल लड़ाई 26 जुलाई 1999 तक चली . पाकिस्तानी आतंकी और उनके वेश मे घुसे सैनिको ने कारगिल पहाड़ी पर कब्जा कर लिया जिसके बाद भारतीय सेनाओं ने अदम्य साहस और वीरता का परिचय देते हुये 26 जुलाई 1999 को कारगिल पर विजय प्राप्त की . भारतीय थल सेना ने पाक  आतंकियों और घुसपैठियों को परास्त करने के लिये आपरेशन विजय शुरू किया. भारतीय थल सेना की मदद के लिये भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन विजय तथा भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन तलवार की शुरुआत की जिसने पाक के छक्के छुड़ा दिये और भारतीय सेना ने कारगिल पर विजय प्राप्त की . उस लड़ाई मे हमारे कई सैनिकों ने जिसमे कैप्टन विक्रम बत्रा , मेजर पदमपति आचार्य, मेजर अजय सिंह तथा लेफ्टिनेंट बलवान सिंह जैसे कई वीर जांबाज योद्धाओं ने अपनी जान की बाजी लगा दी . हमे गर्व है कि हमें उन जैसे वीरों की जन्मभूमि पर पैदा होने का सौभाग्...

मानवता की आवाज: मायावती का प्लान कैसे हुआ फ़ैल ?

मानवता की आवाज: मायावती का प्लान कैसे हुआ फ़ैल ? : देश के अगले राष्ट्रपति का चुनाव हो चुका है. यूपी में बीजेपी की सरकार बने भी चार महीने से अधिक का समय हो चुका है. नियम के मुताबिक अब अगले ...

मायावती का प्लान कैसे हुआ फ़ैल ?

देश के अगले राष्ट्रपति का चुनाव हो चुका है. यूपी में बीजेपी की सरकार बने भी चार महीने से अधिक का समय हो चुका है. नियम के मुताबिक अब अगले दो महीने के अंदर योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्या को सांसद पद से इस्तीफा देकर विधानसभा की सदस्यता लेनी होगी. इस बात की चर्चा उसी वक्त से चल रही है जब बीजेपी ने विधानसभा चुनावों में जीत के बाद योगी को मुख्यमंत्री और केशव प्रसाद मौर्या को उप मुख्यमंत्री बनाया गया था. हालांकि बाद में स्पष्ट हुआ कि ये लोग राष्ट्रपति चुनाव के बाद इस्तीफा देंगे. अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी केशव प्रसाद मौर्या को यूपी में नहीं बल्कि केन्द्र में कोई बड़ी जिम्मेदारी दे सकता है. बीजेपी के इस अप्रत्याशित फैसले के पीछे भी एक राजनीतिक चर्चा मात्र है कि राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद मायावती केशव प्रसाद मौर्या द्वारा छोड़ी जाने वाली फूलपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकती हैं. आपको बता दें कि बीएसपी ने अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की है हालांकि उसने हालिया चुनावों में मिली करारी हार के बाद बीएसपी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए मायावती की रणनीति का खुलासा जर...
भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के जनक, स्वराज्य की माँग रखने वाले और कांग्रेस की उग्र विचारधारा के समर्थक बाल गंगाधर तिलक का जन्म 23 जुलाई 1856 को रत्नागिरि जिले के चिकल गाँव तालुका में हुआ था। इनके पिता का नाम गंगाधर रामचन्द्र पंत व माता का नाम पार्वती बाई गंगाधर था। कहते हैं कि इनकी माता पार्वती बाई ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से पूरे अश्विन महीने (हिन्दी कलैण्डर का महीना) में निर्जला व्रत रखकर सूर्य की उपासना की थी, इसके बाद तिलक का जन्म हुआ था। इनके जन्म के समय इनकी माता बहुत दुर्बल हो गयी थी। जन्म के काफी समय बाद ये दोनों स्वस्थ्य हुये। बाल गंगाधर तिलक के बचपन का नाम केशव था और यही नाम इनके दादा जी (रामचन्द्र पंत) के पिता का भी था इसलिये परिवार में सब इन्हें बलवंत या बाल कहते थे, अतः इनका नाम बाल गंगाधर पड़ा। इनका बाल्यकाल रत्नागिरि में व्यतीत हुआ। बचपन में इन्हें कहानी सुनने का बहुत शौक था इसलिये जब भी समय मिलता ये अपने दादाजी के पास चले जाते और उनसे कहानी सुनते। दादाजी इन्हें रानी लक्ष्मी बाई, तात्या टोपे, गुरु नानक, नानक साहब आदि देशभक्तों और क्रान्तिकारियों की कहानी सुनाते थे। त...
माँ हम विदा हो जाते हैं, हम विजय केतु फहराने आज तेरी बलिवेदी पर चढ़कर माँ निज शीश कटाने आज। मलिन वेष ये आँसू कैसे, कंपित होता है क्यों गात?  वीर प्रसूति क्यों रोती है, जब लग खंग हमारे हाथ। धरा शीघ्र ही धसक जाएगी, टूट जाएँगे न झुके तार विश्व कांपता रह जाएगा, होगी माँ जब रण हुंकार। नृत्य करेगी रण प्रांगण में, फिर-फिर खंग हमारी आज अरि शिर गिराकर यही कहेंगे, भारत भूमि तुम्हारी आज। अभी शमशीर कातिल ने, न ली थी अपने हाथों में। हजारों सिर पुकार उठे, कहो दरकार कितने हैं॥ - चंद्रशेखर आज़ाद

जनसंख्या की चुनौतियां

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बढती जनसंख्या की चुनौतियाँ आज भारत की जनसंख्या काफी तेजी से बढ़ रही है .एक अनुमान के मुताबिक़ भारत की आबादी  2024  में चीन को पीछे छोड़ कर सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश बन जाएगा .यह देश के लिए काफी चिंता का विषय  है . बढ़ती जनसंख्या के लिए रोटी,  कपड़ा ,मकान देना मुश्किल हो जायेगा. आज खेती योग्य जमीन काफी कम रह  गयी है .लोग अपनी आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए खेतों में  घर बना  रहे हैं. बढ़ती जनसंख्या के लिए आज पानी की आपूर्ति करना काफी मुश्किल हो गया है . आज भीड़ में पानी बेहद कम पड़ रहा है..पानी की मांग लगातार बढ़ रही है. बढ़ती जनसंख्या से वाहनों की बिक्री में काफी तेजी आयी  है . वाहनों के  जहरीले धुंये से पर्यावरण लगातार प्रदूषित हो रहा है .आज सरकार के सामने लोगों को आवास देने की भी चुनौती है .लोगों को आवास देने के लिए खेती योग्य जमीन धीरे –धीरे कम हो रही है इसके अलावा सड़क निर्माण  के नाम पर आस-पास के पेड़ों को काटना तथा नहरों को पाटना  पर्यावरण के लिए काफी खतरनाक है . आज बढ़ती जनसंख्या की वजह से अस्पतालों में काफी  भीड़ दिख रह...

मायावती

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मायावती की नई चाल

बसपा प्रमुख मायावती ने राज्‍यसभा से इस्‍तीफा देने की घोषणा की है. मंगलवार को राज्‍यसभा में सहारनपुर हिंसा का मुद्दा उठाते हुए बसपा प्रमुख मायावती ने इस्‍तीफा दे दिया है. इसको उनको बड़े सियासी पैंतरे के रूप में देखा जा रहा है :   1. दरअसल बसपा की दरकती सियासी जमीन के बीच उनका इस्‍तीफा अहम माना जा रहा है. दरअसल  मायावती को यह लगने लगा है कि बीजेपी की नजर बसपा के कोर वोट बैंक पर है . अबकी बार के राष्‍ट्रपति चुनाव में एनडीए और यूपीए दोनों ने ही दलित कार्ड खेला है. 2. एनडीए की ओर से जहां रामनाथ कोविंद मैदान में हैं, वहीं यूपीए की तरफ से मीरा कुमार मैदान में हैं. मौजूदा परिदृश्‍य में रामनाथ कोविंद का जीतना तय माना जा रहा है. बीजेपी ने ही सबसे पहले 'दलित कार्ड' खेलते हुए कोविंद को मैदान में उतारा था. इसको बसपा के कोर वोट बैंक में सेंधमारी के रूप में देखा जा रहा है. 3. अबकी बार यूपी विधानसभा चुनाव में मायावती की बसपा को महज 19 सीटें मिली हैं. बीजेपी ने 403 सदस्‍यीय विधानसभा में 325 सीटों का प्रचंड बहुमत मिला है. उसके बाद से ही माना जा रहा था कि बसपा के किले में बीजेपी ने जबर्दस्‍त से...

कामेडी

औरत के भेष में मर्द एक्टर- एक वक़्त ऐसा था जब एक्टिंग के क्षेत्र में महिलाएं ना के बराबर थीं और इसलिए मर्दों को ही औरत बन कर एक्टिंग करनी पड़ती थी. लेकिन आज अभिनेत्रियों के होने के बावजूद भी एक अभिनेता को औरत के रूप में देखना दर्शकों को पसंद आता है. फ़िल्मों में कई अभिनेताओं ने महिला किरदार निभाया है. ऋषि कपूर, शशि कपूर, महमूद, अमिताभ बच्चन, गोविंदा, जावेद जाफ़री, अक्षय कुमार, शाहरुख खान, आमिर खान, सलमान खान, रितेश देशमुख बॉलीवुड के ऐसे ही नाम हैं. सौ साल की हुई पहली डबल रोल फ़िल्म चालाक औरतों की कहानियां? इनमें से ज़्यादातर कुछ दृश्यों तक या एक गाने तक ही सीमित रहे हैं. लेकिन पिछले कुछ सालों में टेलीविज़न और वेब पर कॉमेडी रोल में जितने भी महिला किरदार पॉपुलर हुए हैं उन सभी को निभाने वाले पुरुष अभिनेता ही हैं. बीबीसी ने ऐसे ही कुछ अभिनेताओं से बात की, जिन्हें उनके महिला अवतार ने लोकप्रियता की नई उंचाई पर पहुंचाया. टॉक टू माय हैंड- किकू उर्फ पलक किकू शारदा सबसे पहले लड़की के वेश में ग्रेट इंडियन कॉमेडी शो में दिखे. कपिल शर्मा के शो से वह पलक के नाम से पॉपुलर हुए. ...

आज के नेताओं के गुण

भौतिक गुण अवस्था – ये चुनाव के समय नरम तथा चुनाव के बाद गरम अवस्था मे पाये जाते हैं रंग- हवा के रूख को देखकर रंग बदलते रहते हैं गंध- बाहर से देशभक्ति की गंध आती है विलेयता – ये किसी भी दल में आसानी से विलेय हो जाते हैं ताप का प्रभाव- रिश्वत नामक उत्प्रेरक की उपस्थिति मे  सामान्य ताप पर भी द्रवित हो जाते हैं रासायनिक गुण - वायु का प्रभाव – हवा के रुख के साथ चलते हैं जल का प्रभाव – जनता की आशाओं पर पानी फेर देते हैं ऊष्मा का प्रभाव- चुनाव न जीतने पर विरोधी दल के लिये विस्फोटक का कार्य करते हैं चुम्बकीय गुण- चुनाव के समय जनता के प्रति  आकर्षण तथा चुनाव जीतने के बाद प्रतिकर्षण पाया जाता हे उपयोग- 1- उद्घाटन  समारोह की आवश्यक वस्तु 2- घेराव तथा धरना के लिये अत्यन्त मजबूत माध्यम 3- सिफारिशों के लिये उपयोगी पदार्थ 4 -देश को बेचने मे अहम साझेदारी 5- वादा करने मे माहिर 

अधूरी इच्छा

अप्रैल, 2002 के दूसरे सप्ताह में गोवा में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी हो रही थी. मीडिया और राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा थी कि गुजरात के सीएम नरेन्द्र मोदी के भविष्य पर क्या फ़ैसला होगा. दिल्ली से उड़े उस विशेष विमान में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ गृह मंत्री लाल कृष्ण आडवाणी बैठे थे. समुंदर के ऊपर जहाज़ उड़ रहा था. जहाज़ में विदेश मंत्री जसवंत सिंह और सूचना तकनीकी मंत्री अरुण शौरी भी थे. बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि इस दो घंटे की यात्रा में शुरुआत में बातचीत गुजरात पर हुई. अटल जी गंभीर मुद्रा में बैठे थे, तब उस चुप्पी को जसवंत सिंह ने तोड़ा, बोले, 'अटल जी, आप क्या सोचते हैं.' अटल जी ने कहा, "कम से कम इस्तीफ़ा ऑफ़र तो करते." तब आडवाणी ने कहा कि अगर नरेन्द्र भाई के इस्तीफ़ा देने से गुजरात के हालात सुधरते हैं तो मैं उन्हें इस्तीफ़ा देने के लिए कह दूंगा, लेकिन मुझे नहीं लगता कि इससे हालात सुधरेंगें और मुझे इस बात पर भी यकीन नहीं हैं कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी भी उनके इस्तीफ़े को मंज़ूर कर लेगी. मोदी को लेकर वाजपेयी और आडवाणी के मतभेद ...