जाति आधारित राजनीति
आज लोकतंत्र में जातिवादिता हावी है. आज जाति आधारित राजनीति काफी ज्यादा हो रही है. आज प्रत्येक पार्टी चुनाव जीतने के लिये किसी जाति विशेष को अपनी तरफ आकर्षित करने का प्रयास करती है. किसी समाज में किसी जाति विशेष के नेता द्वारा किया गया भ्रष्टाचार जब उस जाति विशेष की सामूहिक गरिमा का प्रतीक बन जाय तो लोकतंत्र प्राण विहीन होने लगता है .आज हमारे भारतीय राजनीति में सम्प्रदाय और जाति आधारित राजनीति बहुत ज्यादा हावी है .इसका उदहारण हम इस तरह से देख सकते है की चारा घोटाले जैसे तमाम आर्रोपों के बावजूद लालू यादव लगातार चुनाव जीतते गए , जातीय समीकरण ही था जिसने लालू की जमकर आलोचना करने वाले नीतीश कुमार को भी लालू के साथ आने को विवश किया .जातीय हमदर्दी के कारण ही शहाबुद्दीन जैसा अपराधी भी पांच बार चुनाव जीत जाता है. राजद के मुखिया लालू यादव शायद इसी का फायदा उठा रहे हैं की जनता को जाति और संप्रदाय में बांटकर फिर से सत्ता में आ जायेंगे तभी तो सीबीआई के छापे के बाद भी उन्होंने कहा कि बीजेपी मुझे फ़साने की कोशिश कर रही है ,मै इनकी सरकार को उखाड़ के रहूँगा . जाति आधारित राजनीति देश के बहुत घातक साबित होगी अतः राजनेताओं को जाति आधारित राजनीति छोड़कर विकास की राजनीति करनी चाहिए .
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