कारगिल की लड़ाई
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई ने 1998 में परमाणु परीक्षण के बाद दोनों देशों के बीच आपसी सम्बन्ध को सामान्य करने के उद्देश्य से पाकिस्तान की यात्रा की लेकिन पाक ने इसके बदले मे हमे कारगिल की लड़ाई दी . 6 मई से शुरु हुई कारगिल लड़ाई 26 जुलाई 1999 तक चली . पाकिस्तानी आतंकी और उनके वेश मे घुसे सैनिको ने कारगिल पहाड़ी पर कब्जा कर लिया जिसके बाद भारतीय सेनाओं ने अदम्य साहस और वीरता का परिचय देते हुये 26 जुलाई 1999 को कारगिल पर विजय प्राप्त की . भारतीय थल सेना ने पाक आतंकियों और घुसपैठियों को परास्त करने के लिये आपरेशन विजय शुरू किया. भारतीय थल सेना की मदद के लिये भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन विजय तथा भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन तलवार की शुरुआत की जिसने पाक के छक्के छुड़ा दिये और भारतीय सेना ने कारगिल पर विजय प्राप्त की . उस लड़ाई मे हमारे कई सैनिकों ने जिसमे कैप्टन विक्रम बत्रा , मेजर पदमपति आचार्य, मेजर अजय सिंह तथा लेफ्टिनेंट बलवान सिंह जैसे कई वीर जांबाज योद्धाओं ने अपनी जान की बाजी लगा दी . हमे गर्व है कि हमें उन जैसे वीरों की जन्मभूमि पर पैदा होने का सौभाग्य मिला जिन्होने मातृभूमि की रक्षा के लिये अपने प्राणों की आहूति दे दी . आज कारगिल विजय को 18 साल हो गये . उन वीरों की याद मे हम हर साल 26 जुलाई को कारगिल दिवस मनाते हैं. हमे अपने सैनिकों पर गर्व है.वो हमेशा हमारे दिलों में जिन्दा रहेंगे .
अच्युत द्विवेदी .लखनऊ

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