1993 मुम्बई सीरियल बम धमाका

आखिरकार 24 साल देर से ही सही 1993 सीरियल बम धमाके मे मारे गये लोगों को श्रद्धांजलि मिल ही गई.एक के बाद एक 12 बम धमाको से पूरा मुम्बई दहल गया था.अबू सलेम और उसके साथियों के नापाक हमलों ने बेटों से उनके माता और पिता को छीन लिया ,एक भाई से उसकी बहन को छीन लिया एक पत्नी से उसके सुहाग को छीन लिया .आज उन लोगों के दिल को ठण्डक मिली होगी

मुम्बई की विशेष टाडा कोर्ट ने 7 सितम्बर 2017 को 1993 मुम्बई सीरियल बम ब्लास्ट मामले मे दोषियों को सजा देने का ऐलान किया है.24 साल पुराने इस मामले मे मुम्बई की विशेष टाडा कोर्ट ने अबू सलेम और करीमउल्ला खां को उम्रकैद की सजा का ऐलान किया.

12 मार्च 1993 को मुंबई मे हुये सीरियल बम ब्लास्ट मे मुंबई की विशेष
स्पेशल टाडा कोर्ट ने अबू सलेम और करीमउल्ला खां को उम्रकैद की सजा सुनाई.अबू सलेम
पर 100 ग्रेनेड मुम्बई लाने का आरोप है .इन दोनों पर ,2-2 लाख रुपये का जुर्माना
लगाया गया है,
24 साल पुराने मुम्बई सीरियल बम ब्लास्ट मे बारी बारी से 12 बम धमाके हुये
जिसमें 257 लोगों की मौत हो गई थी तथा 700 से ज्यादा घायल हो गये थे.मुम्बई
ब्लास्ट मे यह पहला फैसला नही है इससे पहले 2006 मे इस केस मे पहला फैसला आया था जिसमे टाडा कोर्ट
ने 123 आरोपियों मे से 99 आरोपियों को सजा सुनाई जिसमे से 23 लोगों को फांसी की
सजा सुनाई .,इसी मामले मे 30 जुलाई 2015 को महाराष्ट्र की यरवडा जेल मे याकूब मेमन
को फांसी दे दी गई. 24 साल पुराने इस केस मे अब तक 104 लोग दोषी करार दे चुके हैं

दोषी
अबू सलेम - आजीवन कारावास की सजा
करीमउल्लाखां - उम्रकैद की सजा
रियाज सिद्दिकी - 10 साल की सजा
फिरोज अब्दुल राशिद खान- फांसी की
सजा
ताहिर मर्चेन्ट- फांसी की सजा
अबू सलेम को 2005 मे अभिनेत्री मोनिका बेदी के साथ पुर्तगाल से प्रत्यर्पण
करके भारत लाया गया था
लेकिन ये अपराधी टाडा कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी जा सकते हैं तो देखते हैं कि आगे क्या होता है.......

अच्युत द्विवेदी की विशेष रिपोर्ट
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