गुरमीत राम रहीम


आखिरकार 15 साल बाद सीबीआई जज जगदीप सिंह ने साध्वी से रेप करने के मामले मे डेरा प्रमुख बाबा राम रहीम को 10 साल की सजा सुनाई. जज ने अपने आदेश मे कहा कि कानून सबके लिये समान है,बाबा को जेल मे आम कैदियों की तरह ही रहना पड़ेगा. उनकी सेवा मे कोई निजी सेवक नही रखा जायेगा. साध्वी से यौन शोषण के मामले मे देर से ही सही मगर अच्छा फैसला है. बाबा की माया की नगरी विंध्वस हो गयी है. हाईकोर्ट ने डेरा समर्थको द्वारा की गयी हिंसा से जो नुकसान हुआ उसकी भरपाई बाबा की सम्पत्ति से की जायेगी .कोर्ट मे बाबा राम रहीम के रोने का और गिड़गिड़ाने का कोई असर नही पड़ा. बाबा राम रहीम अब जेल मे भगवान का भजन कीर्तन करते नजर आयेंगे.आज राम रहीम की हालात बिल्कुल आशाराम.नित्यान्द,सन्त रामपाल जैसी हो गयी है .इन तीनो ने राम के नाम को बदनाम कर दिया .लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है .लोग जो इन बाबाओं को अपने सर आंखों पर बैठाते हैं बदले मे बाबा लोग अपने ही आश्रम की शिष्याओं का यौन शोषण करते है. बाबा के भक्तों की भक्ति हिंसा करने पर उतारु हो जाती है ,कई लोग मरते हैं और कई लोग घायल होते है. अभी भी मंजिल बाकी है क्योंकि बाबा के भक्त कानून के सबसे बड़े मन्दिर सुप्रीम कोर्ट जा सकते है जहां वो अपनी सजा कम करने की अपील कर सकते है. देखना यह है कि अब आगे क्या होता है


आज के दौर मे भी ऐसे जज होते है जो बिना किसी भेदभाव के निष्पक्ष होकर अपना फैसला सुनाते है जिससे जनता का विश्वास न्यायपालिका पर बना रहता है.



सीबीआई जज जगदीप सिंह ने दो साध्वियों के यौन शोषण के मामले मे डेरा प्रमुख आरोपी बाबा राम रहीम को 20 साल की सजा और 30 लाख रुपये जु्र्माने की सजा सुनाई.न्यायमूर्ति जज जगदीप सिंह ने अपनी उदारता दिखाते हुये 14-14 लाख रुपये दोनों साध्वियों को देने का फैसला दिया. सीबीआई जज के सामने आरोपी बाबा राम रहीम के रोने तथा गिड़गिड़ाने का कोई असर नही पड़ा. जज जगदीप सिंह ने स्पष्ट कहा कि उसने अपने भक्तों के साथ एक जंगली जानवर की तरह घिनौना काम किया है इसलिये वह दया का पात्र बिल्कुल नही है.उसने लोगों की धार्मिक भावनाओं और उनके विश्वास को ठेस पहुंचायी है. न्यायमूर्ति जगदीप सिंह बहुत ही कोमल स्वभाव के इंसान है.सितम्बर 2016 को हिसार से पंचकुला आते समय इन्होने रास्ते मे पड़े घायलों को देखकर तुरन्त उन्हे अस्पताल पहुंचाया है और उनकी जान की रक्षा की. न्यायमूर्ति जगदीप सिंह जैसे जज निश्चय ही बधाई के पात्र हैं जिन्होने बिना किसी डर के अपना फैसला दिया.
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