श्वेत पत्र 2017

उत्तर प्रदेश सरकार के श्वेत पत्र 2017 के मुख्य बिन्दु
उत्तर प्रदेश सरकार ने 18-09-2017 को श्वेत पत्र जारी किया जिसके महत्वपूर्ण बिन्दु निम्नलिखित है-:

1.      जून, 2016  में जनपद मथुरा के जवाहर बाग की घटना प्रदेश में ध्वस्त कानून-व्यवस्था की स्थिति 


का प्रमाण है

2.      पूर्ववर्ती सरकारों में प्रदेश के कारागार वस्तुतः आरामगाह के रूप में परिवर्तित हो गए थे

3.      कारागारों में निरुद्ध बंदियों को मोबाइल फोन सहित सारी सुविधाएं सुलभ थीं

4.      पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में मथुरा, मुजफ्फरनगर, बरेली सहित लगभग सभी प्रमुख जनपदों में 
साम्प्रदायिक दंगे हुए .इस प्रकार पिछली सरकार के कार्यकाल में सप्ताह में औसतन दो दंगे हुए

5.      उपज का सही मूल्य न मिलने एवं चीनी मिलों द्वारा समय से पूरा भुगतान न करने के कारण 
किसानों की माली हालत खराब थी. विगत पांच वर्षों में गन्ना किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान समय से 

नहीं किया गया

6.      वर्ष 2014-15 का करीब 45 करोड़, 2015-16 का करीब 235 करोड़,वर्ष 2016-17 का लगभग 2300 

करोड़ रुपए से अधिक गन्ना मूल्य सरकार के गठन पर बकाया था


7.      उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लि0 की मिलों के निजीकरण/विक्रय करने का निर्णय जून, 2007 में लिया गया।

8.      इस पूरी प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखते हुए प्रक्रिया के पूरे चरण में घोर अनियमितताएं बरती
 गई।

9.      निगम के अधीन 11 बंद चीनी मिलों में से 10 इकाइयों के पुनर्संचालन का कोई प्रयास नहीं किया 
गया।

10. कैग के आॅडिट में उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम और उत्तर प्रदेश चीनी एवं गन्ना विकास निगम 
की चीनी मिलों के विक्रय में अनियमितताएं इंगित की गई

11. चीनी एवं गन्ना विकास निगम की 11 मिलों के प्रकरण में कुल एक्सपेक्टेड मूल्य रू0 173.63 करोड़ के विरूद्व रू0 91.65 करोड़ की प्राप्ति हुई

12. वित्तीय  संसाधनों के न होते हुए भी बहुत सी सड़कों की स्वीकृति प्रदान कर दी गई लेकिन
 उन्हें पूरा किए जाने की कोई कार्ययोजना नहीं बनाई गई





13. पिछली सरकार सड़कों के निर्माण के प्रति गंभीर नहीं थी, बल्कि ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की दृष्टि 
से बिना धनराशि उपलब्ध हुए अनुबंध कर लिए गए
14. त्वरित आर्थिक विकास योजनातंर्गत 230 कार्य अपूर्ण रह गए जिनको पूर्ण कराने के लिए लगभग रू. 1385 करोड़ की देनदारी है

15. कुछ आपराधिक छवि के ठेकेदारों द्वारा एक तरह से एकल वर्चस्व बना लिया गया था जिनको प्रदेश
 के बहुत से कार्यों के ठेके दे दिए गए

16. दिल्ली-यमुनोत्री मार्ग का निर्माण जो पीपीपी योजना के तहत पूर्व में स्वीकृत किया गया था, उसमें 
व्यापक स्तर पर अनियमितताओं की शिकायतें हैं

17. पूर्व सरकार द्वारा इस परियोजना पर ध्यान न दिए जाने और उपचारी प्रयास न किये जाने के कारण इस परियोजना पर विवाद उत्पन्न हो गया


18. लोक निर्माण विभाग में पंजीकृत ठेकेदारों की बड़ी संख्या के बावजूद वर्ष 2011-2016 की अवधि में 

रूपये 3300.79 करोड़ रुपये लागत के 5988 अनुबंध (75 प्रतिशत) मात्र 1 या 2 निविदाओं के आधार पर 

किए गए

19. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना प्रदेश में क्रियान्वित ही नहीं की गई पिछली सरकारों में सहकारी समितियों का तंत्र ध्वस्त कर दिया गया, जिसके कारण किसानों को समितियों के माध्यम से बीज और खाद मुहैया नहीं हो सके

20. किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य देने की कोई प्रभावी व्यवस्था न होने के कारण किसानों पर बैंकों के फसली ऋण की बकाया ऋण राशि बढ़ती गई गेहूं की औसतन प्रतिवर्ष 5-6 लाख मीट्रिक टन खरीद की गई। यह खरीद भी आढ़तियों के माध्यम से कराई गई

21. जिससे किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य नहीं मिल सका

22. आलू की खरीद के लिए मूल्य समर्थन की कोई व्यवस्था न होने के कारण आलू उत्पादक किसानों को मजबूर होकर या तो आलू की खेती छोड़नी पड़ी उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग सहित भर्ती करने वाली अन्य संस्थाओं में अराजकता का माहौल था।
23. प्रतियोगी परीक्षाओं में भेद-भाव बरता गया। न्यायपूर्ण परिणाम न मिलने से नौजवान हताश व कुंठाग्रस्त थे विद्युत आपूर्ति जैसी मूलभूत आवश्यकता में भेदभाव किया गया। सुचारू विद्युत आपूर्ति को केवल दर्जन भर जिलों तक सीमित कर दिया गया
24. सड़कों के रख-रखाव और उनकी मरम्मत की ओर कोई ध्यान न देने से हजारों किमी सड़​कों गड्ढ़ायुक्त हो गई ग्रामीण सड़कों की मरम्मत पिछले 10 वर्षाें से अधिक समय से प्रायः नहीं हुई भौतिक सत्यापन के बाद करीब 1.21 लाख किलोमीटर से अधिक सड़कें गड्ढायुक्त पायी गईं, जिनमें 85,000 किमी से अधिक लोक निर्माण विभाग की सड़कें हैं
25. विकास परियोजनाओं को वर्षों तक लम्बित रखने के कारण उनकी लागत में बढ़ोत्तरी हुई। सिंचाई विभाग की अनेक परियोजनाएं इसका जीता-जागता उदाहरण है
26. सिंचाई की महत्वपूर्ण परियोजनाएं-सरयू नहर, बाणसागर, अर्जुनसहायक, मध्यगंगा, भौरटबांध, कन्हर, ऐरच, जसराना, जमरार,आदि को पूरा नहीं किया गया
27. जिस वजह से जहां एक ओर इनकी लागत में भारी वृद्धि हुई, वहीं दूसरी ओर किसान आज भी प्रस्तावित सिंचाई सुविधा से वंचित हैं  प्रदेश के कई इलाके लगातार बाढ़ की विभिषका से ग्रस्त रहे। बाढ़ से सुरक्षा के लिए सुरक्षात्मक कार्य नहीं कराए गए। जिसकी वजह से जनमानस को लगातार बाढ़ की विभिषिका को झेलना पड़ा बुंदेलखंड एवं पूर्वांचल के विकास पर ध्यान न देने के कारण यहां की सड़कें काफी खराब हो गई। ये दोनों क्षेत्र मुख्य धारा में नहीं आ सके  पूर्ववर्ती सरकारों में ऐसे कामों का लोकार्पण किया गया, जो उस समय पूरे नहीं थे
28. ऐसी अधूरी परियोजनाओं में लखनऊ मेट्रो रेल, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे, जय प्रकाश नारायण अन्तर्राष्ट्रीय केन्द्र, गोमती रिवर फ्रंट. , अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम, कैंसर इंस्टीट्यूट, एसजीपीजीआई का ट्राॅमा सेंटर आदि शामिल हैं।
29. आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे का दिसम्बर, 2016 में उद्घाटन कर दिया गया जबकि साइड रोड, ड्रेन, फेनसिंग, पब्लिक एमेनिटी, टोलबूथ व ट्रैफिक मैनेजमेन्ट सिस्टम या तो प्रारम्भ ही नहीं हुआ अथवा अधूरा था साइनेजेज लगाए बिना सड़क पर यातायात प्रारम्भ कर दिया गया था, जो कि यात्री सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बना
30. आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा शुरू किए गए स्वच्छ भारत मिशन के प्रति तत्कालीन सरकार ने पूर्ण अरूचि प्रदर्शित की जबकि यह कार्यक्रम नगरीय एवं ग्रामीण आबादी को स्वच्छ व स्वस्थ परिवेश देने की दिशा में बड़ा व सार्थक प्रयास था पिछली सरकारों के कार्यकाल में गरीबों का राशन उन तक न पहुंचाकर बाजार में बेचने का अनैतिक एवं गैर कानूनी काम किया गया भ्रष्टाचार के कारण लगभग 50 
लाख की संख्या में फर्जी राशन कार्ड जारी किए जाने की आशंका है।

31. अब तक सत्यापन में पात्र गृहस्थी के लगभग 26 लाख 21 हजार तथा अन्त्योदय के करीब 98 हजार राशन कार्ड अपात्र पाए गए हैं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की स्थिति पूरी तरह से चरमरा गई थी अस्पतालों में लगभग 40 फीसदी चिकित्सकों के पद रिक्त थे सरकारी अस्पतालों में औषधियों की समुचित व्यवस्था न होने के कारण जन सामान्य को अधोमानक दवाइयों के उपयोग के लिए बाध्य होना पड़ा
32. राजकीय मेडिकल काॅलेजों में मानक के अनुरूप न तो शिक्षक थे और न ही आवश्यक उपकरण कई स्थानों पर मेडिकल काॅलेजों के लिए भवन निर्मित करा दिए गए, परन्तु वहां पर आवश्यक स्टाफ की तैनाती नहीं की गई इससे शासकीय धन निष्प्रयोज्य पड़ा रहा और जनता को इनका कोई लाभ नहीं मिल पाया प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नगर विकास विभाग द्वारा पिछले वर्षों में अनापत्ति नहीं दी गई। जिसके कारण योजना के तहत केन्द्र सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त नहीं हो सकी
33. अल्पसंख्यक कल्याण के लिए वर्ष 2012-13 से 2016-17 तक बजट में 13 हजार 804 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई जबकि इसके सापेक्ष मात्र 4 हजार 830 करोड़ रुपए की धनराशि का ही उपयोग किया गया
34. इस प्रकार लगभग 9 हजार करोड़ रुपए, जो अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्तियों को लाभान्वित करने में व्यय किए जा सकते थे, अनुपयुक्त पड़ा रहा
35. वर्ष 2007-08 से वर्ष 2009-10 के बीच प्रदेश सरकार द्वारा लखनऊ में 4 व नोएडा में 1 स्मारक के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई परियोजनाओं की मूल वित्तीय स्वीकृति लगभग 944 करोड़ रुपए की थी, जो अंत में संशोधित होकर 4 हजार 558 करोड़ रुपए हो गई 
36. इस प्रकार लागत में 483 प्रतिशत की वृद्धि हुई। परियोजनाओं का कभी भी एक साथ निरोपण नहीं किया गया। भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक की संवीक्षा से स्पष्ट होता है कि स्मारकों के निर्माण में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं
37. विगत पांच वर्षों में परिषदीय विद्यालयों में 23.62 लाख छात्र-छात्राओं की संख्या में गिरावट दर्ज की गई इससे स्पष्ट है कि बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता की तरफ ध्यान नहीं दिया गया प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्यापकों की तैनाती छात्र संख्या के मानक के अनुरूप नहीं की गई
38. विभिन्न विद्यालयों में 65 हजार 597 अध्यापक छात्र संख्या के मानक से अधिक तैनात थे, जबकि दूसरी ओर लगभग 7 हजार 587 विद्यालय एकल अध्यापकीय थे कक्षा 1 से 08 तक के छात्र-छात्राओं को निःशुल्क पाठ्य पुस्तक, यूनीफाॅर्म, निःशुल्क बैग आदि के क्रय एवं वितरण में पारदर्शिता का अभाव था प्रदेश के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की स्थिति काफी खराब है
39. प्रदेश के कार्यरत पीएसयू की वर्ष 2011-12 में करीब साढ़े छह हजार करोड़ रुपए की हानियां वर्ष 2015-16 में बढ़कर लगभग 18 हजार करोड़ रुपए हो गई
40. राज्य के पीएसयू की संचित हानियां 2011-12 में लगभग 29 हजार करोड़ रुपए से अधिक थीं, जो 2015-16 में बढ़कर करीब साढ़े 91 हजार करोड़ रुपए हो गईं वर्ष 2011-12 में पीएसयू के ऋण जहां लगभग 36 हजार करोड़ रुपए थे, वह 2015-16 में बढ़कर लगभग 76 हजार करोड़ हो गए
41. इससे साफ है कि सार्वजनिक उपक्रमों के संचालन में वित्तीय अनुशासनहीनता और भरपूर घोटाले किए गए।
42. 31 मार्च, 2007 को सरकार की ऋणग्रस्तता करीब 1 लाख 35 हजार करोड़ रुपए थी, तो 31 मार्च, 2017 को बढ़कर लगभग 3 लाख 75 हजार करोड़ रुपए हो गई
43. इस प्रकार 10 वर्षाें की अवधि में प्रदेश की ऋणग्रस्तता ढाई गुना हो गई स्पष्ट है कि राजकोषीय घाटा या तो 3 प्रतिशत से अधिक रहा है अथवा विकासात्मक व्यय में कमी कर इसे 3 प्रतिशत तक रखा गया इस पृष्ठभूमि में यह महसूस किया गया कि पिछले 15 वर्षों के दौरान सत्ता में रही सरकारों के कार्यकाल में सभी क्षेत्रों में कुव्यवस्था थी

44.  जन साधारण तथा जनमत के प्रति असाधारण संवेदनहीनता का परिचय देते हुए असामाजिक तत्वों, भ्रष्टाचारियों को प्रश्रय दिया गया एक के बाद एक घोटाले हुए। उन्हें श्वेत पत्र के माध्यम से जनता के समक्ष रखा जा रहा है 

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