कन्या भ्रूण हत्या

कब रुकेगी भ्रूण की जांच ,कब बेटियों की हत्या करना बंद होगा

एक मां अपने बच्चे को 9 महीने कोख में रखती है.इस दौरान वो असहनीय दर्द का सामना करती है.एक पिता अपने बच्चे की देखभाल करता है.फिर वो क्यों भ्रूण जांच कराते  हैं और क्यों लड़कियों को जन्म लेने के पहले ही मार डालते है? एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ मुहिम के तहत  देश भर में कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को जागरुक करते है कि बेटी बोझ नही होती हैं,उसको जन्म लेने दो और उन्हें पढ़ाओँ .वहीं दूसरी तरफ कुछ प्रदेशों में लिंगानुपात में भारी कमी देखी जा रही है.इसमें हैरान करने वाली बात यह है कि जिस हरियाणा से साल 2015 में पीएम मोदी ने बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओ योजना की शुरुआत की थी उसी राज्य में लिंगानुपात में गिरावट देखी गई.बीते दिनों नीति आयोग ने  स्वस्थ राज्य और प्रगतिशील भारत के नाम से एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें गुजरात ,हरियाणा,राजस्थान,उत्तराखण्ड,हिमाचल औऱ छत्तीसगढ़ में लिंगानुपात में गिरावट दर्ज की गई. देश के 21 बड़े राज्यों में से 17 में लिंगानुपात में गिरावट दर्ज होना इस बात का सबूत है 

कि पीएम मोदी की बेटी बचाओ बेटी  पढ़ाओ योजना से कोई फायदा होता नही दिख रहा है.

प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर लोग भ्रूण का परीक्षण अभी भी करा रहे हैं.इस पूरे मामले में अस्पताल प्रशासन भी दोषी हैं जो निजी स्वार्थ के लिए नियमों को ताक पर रखकर भ्रूण परीक्षण कर रहे हैं.सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बेटियों की हत्या जन्म से पहले ही  उनके ही मां बाप क्यों कर दे रहे हैं? क्या गरीबी की वजह से वे ऐसा कदम उठा रहेे हैं? हर पिता की ख्वाहिश होती है कि उसका एक बेटा हो जो उसका वंश आगे बढ़ाए मगर शायद वो भूल जाते हैं कि बेटियां एक साथ दो वंश को आगे बढ़ाती है.बेटा अगर वारस है तो बेटी पारस है.बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नही है.पता नही क्यों लोग बेटे की चाहत रखते हैं और बेटा बड़ा होने पर पिता को बुढ़ापे में मारता पीटता है या वृद्धाआश्रम में छोड़ देता है.जो पिता बचपन में बेटों को उंगली पकड़कर चलाता है वही बेटा आगे चलकर उसका साथ छोड़ देता है और उस वक्त अगर कोई काम देता है तो वह होती है-बेटियां.केन्द्र सरकार और राज्य सरकार दोनों का यह दायित्व है कि आखिर जिस भारत में गार्गी ,अनुसुइया,सावित्री ,कुंती,झांसी की रानी लक्ष्मीबाई,दुर्गावती,कल्पना चावला ,मिताली राज,अवनि चतुर्वेदी,झूलन गोस्वामी,प्रतिभा पाटिल और कल्पना चावला जैसी न जाने कितनी हस्तियां पैदा हुई हैं वो भारत आज लड़कियों के जन्म के लिए लोगों को जागरुक कर रही है फिर भी लोग अजन्मी लड़कियों की हत्या कर देते है.सरकार को तुरंत इस पर कड़ा कानून उठाना चाहिए. अगर इसी तरह लिंगानुपात की कमी होती गई तो वह दिन दूर नही जब इस भारत में लड़के बिना शादी के ही रह जायेंगे.समाज में यह विनाशकारी स्थिति जिस दिन आ जायेगी उस दिन भारत विनाश की कगार पर पहुंच जायेगा क्यों कि कहा गया है कि यत्र नार्यस्तु पुज्यते ,रमन्ते तत्र देवता.
अच्युत द्विवेदी,लखनऊ

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