CAA पर रोक नहीं लगेगी... सुप्रीम कोर्ट की याचिकाकर्ताओं को दो टूक, मोदी सरकार से भी 3 हफ्ते में मांगा जवाब
CAA पर रोक नहीं लगेगी... सुप्रीम कोर्ट की याचिकाकर्ताओं को दो टूक, मोदी सरकार से भी 3 हफ्ते में मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को लागू करने पर रोक लगाने से मना कर दिया है। कोर्ट ने पिछले सप्ताह लागू हुए इस कानून को चुनौती देने वाली 237 याचिकाओं का जवाब देने के लिए केंद्र सरकार को 3 सप्ताह का समय दिया है।
CAA Supreme Court Citizenship Amendment Act: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए), 2019 को लागू करने के लिए लाए गए नागरिक संशोधन नियम 2024 पर रोक लगाने की मांग करने वाले आवेदनों पर केंद्र को नोटिस जारी किया। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा की पीठ ने केंद्र से तीन सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है। मामले में अब अगली सुनवाई 9 अप्रैल को होगी।
CAA पर रोक लगाने की मांग पर अड़े रहे याचिकाकर्ता
हालांकि, इस बीच याचिकाकर्ता नियमों पर रोक लगाने पर अड़े रहे, लेकिन पीठ ने ऐसा कोई आदेश पारित नहीं किया। याचिकाकर्ताओं ने तब कहा कि केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को यह वचन देने के लिए कहा जाना चाहिए कि जब तक शीर्ष अदालत के समक्ष याचिकाएं लंबित हैं तब तक नियमों को लागू नहीं किया जाएगा और नागरिकता नहीं दी जायेगी।
CAA किसी की नागरिकता नहीं लेता
हालांकि, मेहता ने यह बयान देने से इनकार कर दिया कि केंद्र इस बीच किसी को नागरिकता नहीं देगा। उन्होंने कहा कि प्रवासियों को नागरिकता दी जाए या नहीं, इससे कोई भी याचिकाकर्ता प्रभावित नहीं होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीएए किसी की नागरिकता नहीं छीनता।
याचिकाकर्ताओं में से एक का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पूछा कि सीएए पारित होने के लगभग चार साल बाद नियमों को अधिसूचित करने की अचानक क्या जरूरत थी। सिब्बल ने कहा,
चार साल बाद इसकी क्या जल्दी है? अगर नागरिकता की कोई प्रक्रिया शुरू होती है और लोगों को नागरिकता मिलती है, तो यह अपरिवर्तनीय होगी। इसलिए प्रक्रिया शुरू नहीं होनी चाहिए। एक बार जब आप नागरिकता दे देते हैं, तो आप इसे वापस नहीं ले सकते।
प्रवासियों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने कहा,
मैं बलूचिस्तान से हूं, मैं भारत आया, क्योंकि मुझ पर अत्याचार किया गया। अगर मुझे नागरिकता दी गई है, तो इसका उन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने जवाब दिया कि उन्हें वोट देने का अधिकार मिलेगा। जयसिंह ने कहा कि इस अदालत को यह अवश्य कहना चाहिए कि इस अवधि के दौरान दी गई नागरिकता इस अदालत के आदेशों के अधीन होगी। हम अब आशा के साथ नहीं चल सकते और न्यायशास्त्र पर भरोसा नहीं कर सकते।
इस पर सीजेआई ने जवाब दिया, 'लेकिन राज्य स्तरीय समितियों आदि का बुनियादी ढांचा तैयार नहीं है।' इसके बाद सिब्बल ने कहा कि अगर कुछ हुआ तो वे शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। पीठ ने अपने आदेश में कहा,
स्थगन आवेदन पर 2 अप्रैल तक पांच पन्नों तक ही सीमित दलीलें दी जाएं। उत्तरदाताओं को 8 अप्रैल तक आवेदन पर 5 पन्नों का जवाब दाखिल करने दिया जाए।
देश में CAA कब लागू हुआ?
केंद्र सरकार ने 11 मार्च को नागरिकता (संशोधन) नियम, 2024 को लेकर अधिसूचना जारी की। इससे, सीएए पूरे देश में लागू हो गया। नियमों ने पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के इस्लामी देशों में सताए गए अल्पसंख्यकों के सदस्यों को शीघ्र नागरिकता प्रदान करने के लिए सीएए के कार्यान्वयन को खोल दिया।
आईयूएमएल ने CAA के खिलाफ दायर की याचिका
केंद्र सरकार द्वारा सीएए के लिए नियम जारी करने के एक दिन बाद, केरल स्थित राजनीतिक दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने नियमों के कार्यान्वयन पर रोक लगाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। केरल स्थित राजनीतिक दल ने मांग की कि विवादित कानून पर रोक लगाई जाए और इस कानून के लाभ से वंचित मुस्लिम समुदाय के व्यक्तियों के खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाया जाए।
IUML के अलावा, डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI), असम विधानसभा में विपक्ष के नेता, देबब्रत सैका और असम से कांग्रेस सांसद अब्दुल खालिक और अन्य ने भी नियमों पर रोक लगाने के लिए आवेदन दायर किए।
'मनमाने हैं CAA के नियम'
याचिका में कहा गया है कि नियम स्पष्ट रूप से मनमाने हैं और केवल उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर व्यक्तियों के एक वर्ग के पक्ष में अनुचित लाभ पैदा करते हैं, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के तहत अनुमति योग्य नहीं है।
CAA संसद में कब पारित हुआ?
सीएए, 11 दिसंबर, 2019 को संसद द्वारा पारित किया गया। अगले दिन इसे राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी, जिसके बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए। सीएए के तहत हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई समुदायों के शरणार्थियों, जो 31 दिसंबर 2014 के पहले अफगानिस्तान, बांग्लादेश या पाकिस्तान से भारत आए हैं, को नागरिकता प्रदान की जाएगी। हालांकि, पूर्वोत्तर के कुछ क्षेत्रों को इस प्रावधान से छूट दी गई है।
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(लेखक- अच्युत कुमार द्विवेदी)

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