Electoral Bonds: सुप्रीम कोर्ट ने SBI को लगाई फटकार, जारी किया नोटिस; पूछा- अब तक चुनावी बॉन्ड की संख्या का खुलासा क्यों नहीं किया

Electoral Bonds: सुप्रीम कोर्ट ने SBI को लगाई फटकार, जारी किया नोटिस; पूछा- अब तक चुनावी बॉन्ड की संख्या का खुलासा क्यों नहीं किया




Electoral Bonds: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के द्वारा यूनिक अल्फ़ान्यूमेरिक नंबरों के साथ चुनावी बांड डेटा प्रस्तुत नहीं करने पर आपत्ति जताई और उसे नोटिस कर सोमवार को जवाब देने को कहा है। इन नंबरों से बांड की पहचान करने में मदद मिलेगी।  

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, बीआर गवई, जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा कि एसबीआई ने 11 मार्च के अपने आदेश का पूरी तरह से पालन नहीं किया है जिसमें उसने चुनावी बॉन्ड के सिलसिले में बैंक को सभी विवरणों का खुलासा करने का आदेश दिया था। शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा,

संविधान पीठ के फैसले ने स्पष्ट किया कि चुनावी बांड के सभी विवरण खरीद की तारीख, खरीदार का नाम, मूल्यवर्ग सहित उपलब्ध कराए जाएंगे। यह सामने आया है कि एसबीआई ने चुनावी बांड संख्या(अल्फा न्यूमेरिक नंबर) का खुलासा नहीं किया है। इसलिएएसबीआई को नोटिस जारी किया जाए। हम रजिस्ट्री को निर्देश देते हैं कि वह एसबीआई को नोटिस जारी करे।

कोर्ट  ने भारत के चुनाव आयोग के उस अनुरोध को भी स्वीकार कर लिया, जिसमें दो मौकों पर सीलबंद कवर में सुप्रीम कोर्ट को सौंपे गए चुनावी बांड के दस्तावेजों को वापस करने की मांग की गई थी।

चुनाव आयोग ने पीठ को बताया कि उसने गोपनीयता बनाए रखने के लिए इन दस्तावेजों की कोई भी प्रति अपने पास नहीं रखी है और अपनी वेबसाइट पर डेटा अपलोड करने के अदालत के निर्देश पर आगे बढ़ने के लिए सीलबंद लिफाफे वापस करने की मांग की।

शीर्ष अदालत ने कहा कि उसके रजिस्ट्रार न्यायिक यह सुनिश्चित करेंगे कि दस्तावेजों को स्कैन और डिजिटलीकृत किया जाए और एक बार प्रक्रिया पूरी होने के बाद मूल दस्तावेजों को ईसीआई को वापस दे दिया जाएगा और वह उन्हें 17 मार्च को या उससे पहले वेबसाइट पर अपलोड कर देगा।

सुनवाई की शुरुआत में शीर्ष अदालत ने कहा,

भारतीय स्टेट बैंक की ओर से कौन पेश हो रहा है? उन्होंने बांड संख्या का खुलासा नहीं किया है। इसका खुलासा भारतीय स्टेट बैंक को करना होगा।


सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से बैंक को नोटिस जारी करने का आग्रह किया, क्योंकि उन्हें कुछ कहना हो सकता है। बता दें कि कोर्ट ने अपने फरवरी के फैसले में चुनावी बांड योजना को रद्द कर दिया था और एसबीआई को चुनावी बांड जारी करना तुरंत बंद करने का आदेश दिया था। इस बॉन्ड के जरिए राजनीतिक दलों को गुप्त तरीके से चंदा मिलता था।

कोर्ट ने चुनावी बांड योजना के साथ-साथ आयकर अधिनियम और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम में किए गए संशोधनों को भी रद्द कर दिया था, जिसने डोनेशन को सीक्रेट बना दिया था। अदालत ने एसबीआई से राजनीतिक दलों द्वारा भुनाए गए प्रत्येक चुनावी बांड के बारे में ब्योरा देने को कहा था, जिसमें भुनाने की तारीख और चुनावी बांड का मूल्य शामिल होगा।

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